Saturday, 18 July 2009

मैं साहिल पे लिखी कोई इबारत नहीं
जो लहरों से मिट जाती है ...
मैं बारिश की बरसती बूँद नहीं
जो बरस कर थम जाती है ...
मैं वोह एक खवाब नहीं
जिसे देखा और भुला दिया ...
मैं वोह एक शमा नहीं
जिसे फूँका और बुझा दिया ...
मैं हवा का वोह झोंका नहीं
जो आया और गुज़र गया ...
मैं चाँद भी नहीं
जो रात के बाद ढल जाये ...

मैं तो वोह अहसास हूँ
जो तुझ में लहू बन कर गर्दिश करे ...
मैं तो वोह रंग हूँ
जो तेरे दिल पे चढ़े तो कभी न मिटे ...
मैं वोह गीत हूँ
जो तेरे लबो से जुदा न होगा ...
ख्वाब ...इबारत . ..हवा की तरह
चाँद ...बूँद . ..शमा की तरह ...
मेरे मिटने का सवाल नहीं
क्यूँकि मैं तो मोहब्बत हूँ [/undefined]

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