Friday, 17 July 2009

मैने बादल से उसका अस्तित्व पूछा
वो फूट फूट बरस उठा
मैने उससे कहा तेरा ठिकाना है कहाँ
वो कुछ व्याकुल, काला हो चला
मैने पूछा तू किस दिशा से है आया
वो मुझ पर गरज उठा
मेरा मंन घबराया
मूँद के आँखें मैं बैठ गई
वो गरजता रहा बरसता रहा
आँख खुली तो उसे ना पाया
आकाश एकदम साफ था
सूरज की सुनहरी किरण को देख
मन मेरा मुस्कुरा उठा
सूरज बोला
बादल का है बस इतना सा अस्तित्व
तू यूह ना घबरा
गम तुम्हे धमकाएगे
पल पल सताएगे
तू हार कभी ना मान ना
चमकीले दिन भी ज़िंदगी मे आएगे|| Reply View this co

No comments:

Post a Comment